हाइकु
१.गिरते पत्ते, जमीन पे बिखरे ओस की बूंदे।
२.नाचते मोर, काले बादल देख धरा हर्षायी।
३.दिल खिलेंगे, साथी बचपन के फिर मिलेंगे।
तोषण धनगंइहा ९६१७५८९६६७
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