सोमवार, 12 अगस्त 2019

गिरते पत्ते

हाइकु

१.गिरते पत्ते,
जमीन पे बिखरे
ओस की बूंदे।

२.नाचते मोर,
काले बादल देख
धरा हर्षायी।

३.दिल खिलेंगे,
साथी बचपन के
फिर मिलेंगे।

तोषण धनगंइहा
९६१७५८९६६७

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